पूरी रात खुले आसमान में गांव से बाहर रुके सभी मजदूर, नही करने दिया गॉव में प्रवेश

कुढफ़तेहगढ़ थाना क्षेत्र में दिल्ली से मजदूरी कर लौटे 10 मजदूरों को ग्रामीणों ने गांव में नहीं घुसने दिया। रात में ही डॉक्टरों को बुलाने के लिए फोन किया, लेकिन जब डॉक्टर नहीं पहुंचे तो उनके रुकने की व्यवस्था गांव के बाहर ही कर दी गई। रविवार को दोपहर डॉक्टरों की टीम गांव में पहुंच गई। उनकी जांच की गई। उसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया।



गांव दारनी निवासी 10 मजदूर पिछले कई दिनों से दिल्ली में रहकर मेहनत मजदूरी करते थे। देश में लॉकडाउन हुआ तो सभी मजदूर वापस गांव लौट आए। शनिवार की रात लगभग 11 बजे यह मजदूर गांव में पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें गांव से बाहर ही रोक दिया। डॉक्टरों को फोन किया तो वह नहीं पहुंचे, इसके बाद गांव के बाहर ही उन्हें रोक दिया गया, इसके बाद रविवार को दोपहर डॉक्टरों की टीम ने पहुंचकर सभी की जांच की। उसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया और उनसे 14 दिनों तक क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया।


पहले दिन तो नियम तोड़े अब शारीरिक दूरी का ध्यान रख हुई खरीदारी


प्रधानमंत्री ने जनता के की सुरक्षा और देश के हर नागरिक को बचाने के लिए लॉक डाउन किया। यह लॉक डाउन जनता के लिए और जनता यदि इसे नहीं मानेगी तो स्थिति खराब हो जाएगी। शनिवार की सुबह शहर की मंडी समिति में यही हाल दिखा था। हालांकि रविवार को स्थिति सही रही और मंडी समिति में शारीरिक दूरी बनाकर खरीदारी की गई।


रविवार की सुबह सात बजे अचानक से लोगों की भीड़ उमड़ी और यहां फल व सब्जी की दुकानों पर मछली बाजार जैसा माहौल हो गया। एक दूसरे को धक्के मारते लोग सामान खरीदने लगे थे। न शारीरिक दूरी का ख्याल और न कोरोना से जागरूकता की कवायद। मानो लोग भी भूल गए थे और मंडी समिति के जिम्मेदार भी। पुलिस विभाग ने भी यहां किसी की ड्यूटी नहीं लगाई थी जो लोगों को शारीरिक दूरी का पालन करने की हिदायत देता। ऐसे में किसी ने सूचना एसडीएम सम्भल राजेश कुमार को दे दी थी। एसडीएम ने थाना प्रभारी और मंडी समिति के जिम्मेदारों के पेंच कसे। रविवार को शारीरिक दूरी का पालन हुआ और दुकानदारों ने भी लोगों को दूरी पर खड़े होकर सामान खरीदने को कहा। एसडीएम सम्भल राजेश कुमार ने कहा कि भीड़ भाड़ वाले इलाके में मॉनीटङ्क्षरग करते हुए इसे प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा।